भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितंबर) का पहला दीर्घावधि पूर्वानुमान (Long Range Forecast) जारी किया। IMD के अनुसार इस साल कुल मानसून वर्षा LPA (Long Period Average) का 92% रहने की सर्वाधिक संभावना है — जो "सामान्य से नीचे" (Below Normal) श्रेणी में आता है। यह 2023 के बाद पहली बार है जब भारत को below-normal मानसून का सामना करना पड़ रहा है। निजी मौसम एजेंसी Skymet ने भी स्वतंत्र रूप से LPA का 94% वर्षा अनुमानित की है। इसके साथ NOAA, ECMWF और WMO के आंकड़े भी एक संभावित Super El Niño की ओर इशारा कर रहे हैं।
1. IMD का आधिकारिक पूर्वानुमान — विस्तृत विश्लेषण
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने मौसम भवन, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून 1971–2020 के 87 सेमी LPA का 92% रहेगा, यानी लगभग 80 सेमी वर्षा। यह five-category वर्गीकरण में "Below Normal" श्रेणी है।
🌧️ IMD का पाँच-श्रेणी वर्षा संभाव्यता पूर्वानुमान IMD
| श्रेणी | वर्षा सीमा (LPA%) | पूर्वानुमान संभावना | जलवायु-संभावना |
|---|---|---|---|
| कम (Deficient) | < 90% | 35% | 16% |
| सामान्य से नीचे (Below Normal) | 90–95% | 31% | 17% |
| सामान्य (Normal) | 96–104% | 27% | 33% |
| सामान्य से अधिक (Above Normal) | 105–110% | 6% | 16% |
| अत्यधिक (Excess) | > 110% | 1% | 17% |
स्रोत: IMD आधिकारिक विज्ञप्ति, 13 अप्रैल 2026 | Tercile climatological probability = 33.33% प्रत्येक
IMD की यह MME (Multi-Model Ensemble) पूर्वानुमान प्रणाली विभिन्न वैश्विक जलवायु मॉडलों — जिनमें MMCFS (Monsoon Mission Climate Forecast System) प्रमुख है — के संयुक्त आकलन पर आधारित है। यह पूर्वानुमान अप्रैल की प्रारंभिक परिस्थितियों पर तैयार किया गया है।
2. IMD बनाम Skymet — दोनों एजेंसियों का तुलनात्मक पूर्वानुमान
इस साल उल्लेखनीय यह है कि दोनों प्रमुख मौसम एजेंसियों ने स्वतंत्र रूप से below-normal मानसून का पूर्वानुमान दिया है, हालाँकि संख्या में थोड़ा अंतर है:
"El Niño evolve होते ही यह जुलाई-अंत, अगस्त और सितंबर में ताकत पकड़ेगा। किसानों को सलाह है कि अत्यधिक पानी की जरूरत वाली फसलें न लगाएं।" — महेश पालावत, VP (जलवायु एवं मौसम विज्ञान), Skymet Weather | Khaleej Times, अप्रैल 2026
⚠️ Skymet का अतिरिक्त जोखिम आकलन Skymet
- Drought की संभावना: 30%
- Below Normal वर्षा की संभावना: 40%
- अगस्त 2026 में below-normal मानसून की संभावना: लगभग 60%
- अनुमानित कुल वर्षा: ~817 mm (LTA 868.6 mm के मुकाबले)
3. मानसून को प्रभावित करने वाले प्रमुख जलवायु कारक
3a. El Niño — सबसे बड़ा खतरा
वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में कमज़ोर La Niña जैसी परिस्थितियाँ ENSO-तटस्थ अवस्था में बदल रही हैं। MMCFS के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ऋतु के दौरान El Niño विकसित होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक एजेंसियों के आंकड़े और भी चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं:
🌡️ El Niño — वैश्विक एजेंसियों का संयुक्त आकलन
- NOAA (9 अप्रैल 2026): जून–अगस्त 2026 में El Niño विकसित होने की 61% संभावना। Strong El Niño की संभावना: 33% NOAA
- ECMWF: C3S ensemble में NINO3.4 anomaly 0.2°C से 3.3°C तक का फैलाव; अधिकांश मॉडल +1°C से ऊपर। Moderate El Niño: 98%, Strong: 80%, Super: 20–25% ECMWF
- US Climate Prediction Centre: June–August में El Niño emergence: 62% संभावना; वर्ष के अंत तक बने रहने की संभावना। ENSO-neutral: अभी 55% CPC
- WMO (फरवरी 2026): April–June में ENSO-neutral: ~70% संभावना; El Niño विकास: ~30% और बढ़ रहा है WMO
⚡ Super El Niño का उभरता खतरा
1950 के बाद से केवल 5 बार "Super El Niño" आया है (1982-83, 1997-98, 2015-16 सबसे उल्लेखनीय)। अब कई मॉडल 2026-27 में एक असाधारण घटना की ओर इशारा कर रहे हैं:
- प्रशांत महासागर की सतह के नीचे असामान्य रूप से गर्म पानी का बड़ा भंडार मौजूद है — जो Super El Niño का पूर्वसंकेत है।
- Copernicus (EU) ने मार्च 2026 को दूसरा सर्वाधिक उच्च समुद्री सतह तापमान वाला महीना दर्ज किया।
- अगर यह Super El Niño बना, तो 1982-83, 1997-98 और 2015-16 से भी अधिक ताप विसर्जित कर सकता है।
स्रोत: Severe Weather Europe, Daily Pioneer, ECMWF Science Blog — अप्रैल 2026
3b. Indian Ocean Dipole (IOD) — आंशिक राहत की उम्मीद
वर्तमान में हिंद महासागर में तटस्थ IOD परिस्थितियाँ हैं। नवीनतम जलवायु मॉडल बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अंत तक Positive IOD विकसित होने की संभावना है। Positive IOD आमतौर पर अच्छी मानसून वर्षा लाता है और El Niño के नकारात्मक प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकता है।
✅ IOD और हिमकवर — दो सकारात्मक संकेत
- Positive IOD विकास: मानसून के उत्तरार्ध (अगस्त–सितंबर) में El Niño के प्रभाव को कुछ हद तक कम करेगा। IMD और Skymet दोनों ने इसे सकारात्मक माना है।
- उत्तरी गोलार्ध में कम हिमकवर: जनवरी–मार्च 2026 में यूरेशिया में हिमकवर सामान्य से थोड़ा कम रहा। हिमकवर और मानसून वर्षा का आमतौर पर विपरीत संबंध होता है — कम हिमकवर = बेहतर मानसून का संकेत।
- Global Warming का अतिरिक्त कारक: पूर्व IMD DG और जलवायु वैज्ञानिक K.J. Ramesh के अनुसार, 2000 के बाद से मानसून वर्षा में अतिरिक्त नमी जुड़ रही है, जिससे राजस्थान जैसे क्षेत्रों में अप्रत्याशित बारिश देखी गई है।
3c. El Niño हमेशा बुरा नहीं: ऐतिहासिक तथ्य
1950 के बाद से जब भी El Niño आया, 16 में से केवल 9 बार (यानी 56%) मानसून दबा। शोध बताता है कि Central Pacific (CP/Modoki) El Niño भारत में सूखे की अधिक संभावना लाता है जबकि Eastern Pacific (EP) El Niño का प्रभाव कम पूर्वानुमानित होता है।
4. क्षेत्रीय वर्षा वितरण — आपके राज्य पर क्या होगा असर?
IMD की MME मॉडल का स्थानिक वितरण (Spatial Distribution of Tercile Categories) बताता है कि देश के अधिकांश हिस्सों में below-normal वर्षा सर्वाधिक संभावित है, जबकि कुछ अपवाद भी हैं:
| क्षेत्र | अनुमानित वर्षा (LPA%) | स्थिति | सर्वाधिक जोखिम वाली फसलें |
|---|---|---|---|
| मध्य भारत (MP, छत्तीसगढ़, विदर्भ) | 75–85% | ⚠️ कम वर्षा | धान, सोयाबीन, कपास |
| पश्चिमी भारत (गुजरात, राजस्थान) | 80–90% | ⚠️ कम–सामान्य से नीचे | मूंगफली, बाजरा, कपास |
| महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र | 80–92% | ⚠️ सामान्य से नीचे | कपास, दलहन, सोयाबीन |
| उत्तर भारत (UP, बिहार, हरियाणा) | 88–100% | 🟡 सामान्य से नीचे–सामान्य | धान, दलहन, मक्का |
| दक्षिण प्रायद्वीप (केरल, TN, कर्नाटक) | 90–102% | 🟢 आंशिक राहत | धान, केला, रबड़ |
| पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय) | 92–105% | 🟢 सामान्य के करीब | चाय, जूट, धान |
| उत्तर-पश्चिम (पंजाब, हिमाचल) | 90–100% | 🟡 मिश्रित | धान, मक्का |
स्रोत: IMD Long Range Forecast — Tercile Probability Spatial Distribution Map, 13 अप्रैल 2026
5. महीने दर महीने पूर्वानुमान — El Niño का चरणबद्ध प्रभाव
जून 2026 — मानसून का आगमन (अपेक्षाकृत बेहतर)
ENSO अभी तटस्थ; El Niño का पूर्ण प्रभाव अभी नहीं। IMD के अनुसार मानसून केरल में सामान्य समय (1 जून) के आसपास पहुँच सकता है। जून में El Niño का प्रभाव सीमित रहेगा। Skymet और IMD दोनों इस महीने को अपेक्षाकृत बेहतर मानते हैं।
जुलाई 2026 — मिश्रित परिस्थितियाँ
El Niño विकसित होना शुरू होगा। मध्य जुलाई तक पूरे देश में मानसून फैल जाएगा। वर्षा में क्षेत्रीय असमानता दिखने लगेगी। Skymet के अनुसार जुलाई में भी Dry Spells संभव हैं।
अगस्त 2026 — El Niño का सक्रिय प्रभाव (सबसे महत्वपूर्ण)
Skymet के अनुसार अगस्त में below-normal वर्षा की संभावना लगभग 60%। El Niño पूरी तरह विकसित होगा। खरीफ फसलों के लिए सबसे नाजुक महीना। Mahesh Palawat (Skymet): "El Niño जुलाई-अंत से ताकत पकड़ेगा।"
सितंबर 2026 — सबसे कमज़ोर महीना (El Niño चरम पर)
MMCFS के अनुसार सीज़न के अंत में El Niño सबसे मजबूत होगा। हालाँकि Positive IOD इस महीने विकसित हो सकती है, जिससे कुछ राहत संभव। मध्य और उत्तरी भारत में सूखे जैसी परिस्थितियाँ बन सकती हैं।
6. RBI की चेतावनी और आर्थिक प्रभाव
8 अप्रैल 2026 को RBI ने अपनी मौद्रिक नीति घोषणा के दौरान El Niño को मुद्रास्फीति के लिए संभावित खतरा बताया। यह चेतावनी Skymet के पूर्वानुमान के बाद आई।
📊 अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव RBI
- कृषि उत्पादन: दलहन और तिलहन (जो 60% rainfed क्षेत्र में उगाए जाते हैं) सबसे अधिक जोखिम में
- खाद्य मुद्रास्फीति: दाल, खाद्य तेल और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं
- ग्रामीण माँग: FMCG, दोपहिया वाहन, कृषि उपकरण — सभी प्रभावित
- पनबिजली: 5–10% कम जल विद्युत उत्पादन; ऊर्जा ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव
- RBI की चुनौती: खाद्य मुद्रास्फीति के कारण ब्याज दर कटौती की संभावना सीमित हो सकती है
- GDP: 2023-24 El Niño (non-Super) से कृषि उत्पादन 6.1% गिरा था — 2026 में जोखिम अधिक
Irrigation coverage सुधरी है (49.3% से 55% GCA तक, FY16–FY21), और मानसून भारत की 70%+ वार्षिक वर्षा देता है। 40% कृषि उत्पादन rainfed क्षेत्र से आता है।
7. खरीफ फसलों पर प्रभाव — किसानों के लिए विशेष विश्लेषण
| फसल | जल आवश्यकता | जोखिम स्तर | विशेष चेतावनी |
|---|---|---|---|
| धान (चावल) | 800–1200 mm | 🚨 अधिक | जुलाई–अगस्त में सूखे जैसे दौर से grain setting प्रभावित |
| दलहन (मूंग, उड़द, अरहर) | 400–600 mm | ⚠️ मध्यम–अधिक | Rainfed होने से सर्वाधिक असुरक्षित |
| तिलहन (सोयाबीन, मूंगफली) | 600–800 mm | ⚠️ मध्यम | उत्पादन में 10–15% कमी संभव |
| मक्का | 500–800 mm | 🟡 मध्यम | Flower drop और reduced yield का खतरा |
| कपास | 600–1000 mm | ⚠️ मध्यम | महाराष्ट्र, गुजरात में अधिक असर |
| गन्ना | 1500–2500 mm | 🚨 अधिक | सिंचाई पर निर्भर, लेकिन नमी की कमी बुरी |
✅ किसानों के लिए IMD और Skymet की संयुक्त सलाह
- सूखा-सहनशील किस्में: बाजरा, ज्वार, मोठ जैसी drought-tolerant फसलें लगाएं
- जल संचयन: खेत में तालाब, Farm Pond और Drip Irrigation की व्यवस्था अभी करें
- फसल बीमा: PM Fasal Bima Yojana में नाम दर्ज करवाएं — अंतिम तिथि न चूकें
- बुआई का समय: पहली बारिश होते ही बुआई करें; देर न करें
- Mulching: मिट्टी की नमी बचाने के लिए पुआल/पत्तियों से मल्चिंग करें
- अंतरफसल (Intercropping): विविध फसलें लगाकर जोखिम कम करें
- PM KUSUM: सौर ऊर्जा चालित पंप के लिए इस योजना का लाभ लें
8. पिछले वर्षों से तुलना — 2026 कितना खतरनाक?
| वर्ष | वर्षा (% LPA) | वर्गीकरण | ENSO | कृषि प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| 2015 | 86% | Deficient | Super El Niño | गंभीर सूखा |
| 2023 | 102% | Normal | El Niño | अच्छी फसल |
| 2024 | 98% | Normal | Neutral | अच्छी फसल |
| 2025 | 101% | Normal | La Niña | बहुत अच्छी फसल |
| 2026 | 92% | Below Normal | El Niño (developing) | मध्यम से गंभीर चिंता |
🔍 महत्वपूर्ण विश्लेषण
2026 का 92% पूर्वानुमान 2015 (86%) जितना गंभीर नहीं है, लेकिन यह लगातार तीन अच्छे मानसून वर्षों के बाद आया है। Past data से पता चलता है कि below-normal वर्षा वाले वर्षों में भी अगर वितरण और समय सही हो तो खरीफ उत्पादन बड़ा नुकसान नहीं उठाता — लेकिन dals और oilseeds (rainfed) सबसे संवेदनशील रहते हैं।
भारत के पास 2-3 साल का अनाज भंडार है, इसलिए गंभीर खाद्य संकट की संभावना कम है, लेकिन कीमतों में वृद्धि और ग्रामीण आय में कमी की आशंका वास्तविक है।
9. गर्म मौसम का मौसम (अप्रैल–जून 2026) — लू और तापमान का पूर्वानुमान
IMD ने 31 मार्च 2026 को अप्रैल–जून 2026 के लिए तापमान और लू का भी विशेष पूर्वानुमान जारी किया। इसके अनुसार:
🌡️ April–June 2026 Heat Wave Outlook IMD — 31 मार्च 2026
- अधिकतम तापमान: देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से नीचे, लेकिन पूर्व और पूर्वोत्तर भारत, मध्य भारत के पूर्वी भाग और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सामान्य से ऊपर।
- न्यूनतम तापमान: देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से ऊपर रहेगा।
- अप्रैल 2026 वर्षा: देशभर में औसत वर्षा LPA के 112% से अधिक रहने की सर्वाधिक संभावना। पूर्वोत्तर भारत में below-normal।
- लू (Heatwave) अप्रैल में: ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में above-normal लू के दिन।
- कृषि प्रभाव: बोरो चावल, मक्का, मूंग, उड़द में heat stress; गेहूं और सरसों में terminal heat stress (उत्तर-पश्चिम भारत में) — शीघ्र कटाई की सलाह।
10. आगामी पूर्वानुमान — अगली अपडेट कब?
| पूर्वानुमान चरण | संभावित तिथि | क्या मिलेगा? |
|---|---|---|
| दूसरा चरण (2nd Stage LRF) | मई के अंतिम सप्ताह (25–27 मई 2026) | चार क्षेत्रों का विस्तृत पूर्वानुमान, Monsoon Onset तिथि, जून का outlook |
| जून का मासिक अपडेट | जून के अंत में | जुलाई वर्षा का पूर्वानुमान |
| जुलाई का अपडेट | जुलाई के अंत में | अगस्त + सीज़न के उत्तरार्ध (Second Half) का outlook |
| अगस्त का अपडेट | अगस्त के अंत में | सितंबर का मासिक पूर्वानुमान |
11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
12. मुख्य निष्कर्ष
📌 मानसून 2026 — याद रखने योग्य बातें
- 92% LPA (IMD) / 94% LTA (Skymet): दोनों एजेंसियों ने below-normal पूर्वानुमान दिया — यह पहली बार 2023 के बाद।
- 35% Deficient संभावना: वर्षा 90% से भी नीचे जाने का उल्लेखनीय जोखिम।
- El Niño सबसे बड़ा खतरा: NOAA (61%), ECMWF (Strong 80%), IMD-MMCFS — सभी El Niño की ओर इशारा।
- Super El Niño का उभरता जोखिम: ECMWF के अनुसार 20–25% संभावना; 1982-83, 1997-98 और 2015-16 जैसा।
- अगस्त–सितंबर सबसे कमज़ोर: El Niño का चरम प्रभाव — खरीफ के लिए नाजुक समय।
- Positive IOD और कम Snow Cover: दो सकारात्मक कारक जो नुकसान घटा सकते हैं।
- RBI की चेतावनी: El Niño = food inflation risk = ब्याज दर कटौती की सीमित गुंजाइश।
- अगला बड़ा अपडेट: मई अंतिम सप्ताह — क्षेत्रीय विवरण और Onset तिथि।
निष्कर्ष
मानसून 2026 निश्चित रूप से एक चुनौती है — तीन अच्छे वर्षों के बाद पहला below-normal पूर्वानुमान। IMD का 92% और Skymet का 94% LPA अनुमान, NOAA की El Niño संभावना और ECMWF के Super El Niño संकेत मिलकर एक गंभीर तस्वीर बनाते हैं। लेकिन यह अंतिम निर्णय नहीं है — Positive IOD, below-normal हिमकवर, और Global Warming के कारण अतिरिक्त नमी कुछ राहत दे सकती है।
"Positive IOD की संभावित घटना और उत्तरी गोलार्ध में कम हिमकवर — ये दो कारक El Niño के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।" — मृत्युंजय महापात्र, महानिदेशक, IMD | Down To Earth, अप्रैल 2026
अभी से सही तैयारी — जल संचयन, drought-tolerant फसलें, सिंचाई व्यवस्था और फसल बीमा — मानसून 2026 की चुनौती को प्रबंधनीय बना सकती है। IMD का मई अंत का अपडेट अधिक स्पष्ट तस्वीर देगा।
